“राजनांदगांव मड़ई-हमर माटी के मड़ई तिहार” : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का भव्य उत्सव

0
2
Spread the love

राजनांदगांव। राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोक संस्कृति, परंपरा, कला और ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजनांदगांव मड़ई-हमर माटी के मड़ई तिहार का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह 10 दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोक जीवन की सादगी और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा लोक कलाकारों एवं ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने का कार्य किया जाएगा।
कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू, डायरेक्टर ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन एवं चेयरमैन, अलवा फाउंडेशन ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, भाई-चारे और लोक जीवन की अनमोल विरासत का प्रतीक है। आज तेजी से बदलते आधुनिक परिवेश में हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं कहीं न कहीं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समय में हमर माटी के मड़ई तिहार जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की दिशा में अत्यंत आवश्यक और सार्थक पहल हैं।
उन्होंने कहा कि मड़ई तिहार सदियों से छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। गांवों में आयोजित होने वाली मड़ई केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोक जीवन की आत्मा को अभिव्यक्त करने का उत्सव है। इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीण परिवेश की परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की विविधता को मंच प्रदान किया जाएगा।
डॉ. साहू ने आगे कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और आत्मीयता की भावना को जागृत करना है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक संस्कारों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हमर माटी के मड़ई तिहार युवाओं को अपनी संस्कृति को समझने, अपनाने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा।
अलवा फाउंडेशन के फाउंडेशन होमन देशमुख ने कहा कि यह आयोजन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि गांवों और कस्बों में अनेक प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें उचित मंच नहीं मिल पाता। इस मड़ई तिहार के माध्यम से लोक कलाकारों, शिल्पकारों, पारंपरिक वाद्य यंत्र कलाकारों एवं स्वयं सहायता समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि 10 दिनों तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकनृत्य जैसे पंथी, करमा, सुवा, राऊत नाचा एवं लोकगीतों की शानदार प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताएं, हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल, सांस्कृतिक परिचर्चाएं तथा युवाओं एवं बच्चों के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।
महोत्सव में प्रदेशभर से लोक कलाकार, सांस्कृतिक दल एवं ग्रामीण प्रतिभाएं शामिल होकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन स्थल को छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पारंपरिक शैली में सजाया जाएगा, जिससे लोगों को गांव की मड़ई और लोक जीवन का वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सके।
आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं सांस्कृतिक संवर्धन जैसे विषयों को भी समाज के सामने प्रस्तुत करेगा। कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।
डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने जिलेवासियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं कला प्रेमियों से अपील करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस सांस्कृतिक महोत्सव में शामिल होकर अपनी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति से जुड़ा रहता है, तभी उसकी पहचान और आत्मा जीवित रहती है।
राजनांदगांव मड़ई-हमर माटी के मड़ई तिहार निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *