सचिव संघ ने हड़ताल खत्म कर 24 घंटे भीतर काम पर लौटने के आदेश को बताया तानाशाही फरमान
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मोहला – प्रदेश में पंचायत सचिवों की शासकीयकरण की मांग को लेकर 17 मार्च से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल और उग्र हो गई है। शासन ने सचिव संघ को 24 घंटे के भीतर हड़ताल समाप्त कर अपने कार्यस्थल पर लौटने का आदेश दिया है। लेकिन सचिव संघ ने इस आदेश को न मानते हुए आदेश की प्रति जलाकर अपना विरोध प्रकट किया।

सचिव संघ के पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा की विधानसभा चुनाव 2023- 24 में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के तहत प्रदेश के पंचायत सचिवों की मांग शासकीय करण को तीस दिवस के भीतर कमेटी गठन कर पूरा किया जाएगा। परंतु सरकार अपने वादों को भूल गई है। जिसके कारण सचिव संघ हड़ताल करने को मजबूर हो गया। और अब तानाशाही फरमान जारी करते हुए 24 घंटे के अंदर हड़ताल समाप्त कर वापस जाने का आदेश जारी कर दिया।
“शासन के दमनकारी आदेश से हम डरने वाले नहीं हैं। जब तक हमारी एक सूत्रीय मांग, यानी शासकीयकरण, पूरी नहीं होती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। यह आर-पार की लड़ाई है।”
शासन के सख्त रुख के बावजूद सचिव संघ ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। जैसे हमने 17 मार्च को विधानसभा का घेराव किया था वैसे ही पूरे प्रदेश के पंचायत सचिव 1 अप्रैल को विधानसभा घेराव करेंगे उसके बाद जेल भरो आन्दोलन किया जाएगा। सचिवों की इस हड़ताल से ग्राम पंचायतों का कामकाज ठप हो गया है। कई विकास योजनाएं और सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
शासन ने चेतावनी दी है कि अगर सचिव 24 घंटे के भीतर हड़ताल समाप्त नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, सचिव संघ के उग्र रुख से प्रदेश में प्रशासनिक गतिरोध गहराने की आशंका है।
