रिटायर्ड फौजी के परिवार से रिश्वत वसूली, मामला उजागर होने के डर से पुलिस ने लौटाए पैसे

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मोहला – विष्णु देव साय के सुशासन में एक ओर प्रशासन भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करता है, दूसरी ओर ज़मीनी हकीकतें कुछ और बयां करती हैं। मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के चिल्हाटी थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि पूरे तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।

मामले में पुलिस ने मवेशी तस्करी के नाम पर कारगिल युद्ध लड़ चुके रिटायर्ड फौजी के परिवार से न केवल एक लाख से अधिक की अवैध वसूली की, बल्कि गरीब किसान से बैल बिक्री की रकम भी थाने में मंगवाकर जब्त कर ली। बाद में मामला बढ़ता देख पीड़ितों के गांव जाकर रिश्वत की राशि वापस की गई।

 

ज्ञात हो कि 20 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के कोरची तहसील स्थित खुनारा गांव से आए रिटायर्ड फौजी चतुर सिंदराम के बड़े भाई मथुर सिंदराम ने अंबागढ़ चौकी विकासखंड के कोलियाटोला निवासी किसान रामकुमार सलामे से एक जोड़ी बैल खरीदा था। लौटते समय जब बैल को पीकअप वाहन में लादकर अपने गांव ले जाया जा रहा था, तभी चिल्हाटी थाना के सामने आबकारी चेक पोस्ट पर वाहन को रोककर तस्करी के संदेह में थाने ले जाया गया। बैल, वाहन और उसमें सवार पांच लोगों को पूरी रात भूखा-प्यासा पूछ ताछ कर थाने में कैद रखा गया।

 

 

सबसे हृदयविदारक पहलू यह था कि रातभर हिरासत में रहे मथुर सिंदराम की मां का 21 अप्रैल को देहांत हो गया। अंतिम संस्कार में शामिल होने से पहले उसे चिल्हाटी थाने को पैसे रिश्वत के रूप में देनी पड़ी। बताया गया कि वह महाराष्ट्र जाकर गांववालों से पैसे इकट्ठा कर लौटा और फिर थाने से रिहा हुआ।

 

 

 

बैल बेचने वाले किसान रामकुमार सलामे को फोन के माध्यम से थाना स्टाफ राजेश बोगा ने बुढ़ा देव का हवाला देते हुए दबाव पूर्ण मीडिया (पत्रकारों) को घटना के बारे में जानकारी देने से मना किया कि “साहब” ने बताने से मना किया है, जिसकी रिकॉर्डिंग की गई है। वही सलामे ने बताया उससे 34,500 रुपए को बाहर ग्राउंड में लिया गया, जहां बैलों को बांधा गया था।

 

 

 

मथुर सिंदराम के पड़ोसी माधव बाबू राव 21 अप्रैल को रवि मंडावी जो कि मथुर के भांजा है, दोनों साथ में थाना चिल्हाटी पहुंचे जहां उन्हें सिंदराम को छुड़ाने के लिए पैसों की मांग रखी गई।

“माधव बाबू राव …”साहब मथुर सिंदराम के माता का निधन हो गया है, जो भी करना है बताओ…  साहब कुछ बोलते ही नहीं हैं, वही राजेश बोगा ने कहा साहब पचास हजार लेंगे तब साहब मानेगा”

 

 

यह मामला सिर्फ पुलिसिया भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि मानवता के गिरते स्तर का प्रतीक बन गया है। जब एक कारगिल फौजी का परिवार अपमानित होता है, तब सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, हम सभी की संवेदनाओं पर भी खड़ा होता है। जहां एक मां मृत्यु शय्या पर लेटी पड़ी थी दूसरी ओर पुत्र को कंधा देने से पहले पुलिस को रिश्वत देना पड़ रहा था। पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार चल रहा है ऐसे में पुलिस पर रिश्वतखोरी के आरोप लग रहे हैं। क्या शासन प्रशासन इस पर कठोर कार्यवाही करेगी या लीपा पोती करेगी।

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