राजगामी संपदा न्यास में नियुक्ति को लेकर शिकायत, निरस्तीकरण की मांग

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Kristofar Paul
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राजनांदगांव । लगातार विवादों में घिरे रहने वाले ‘श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा न्यास’ की अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारी कटघरे में आ खड़े हुए हैं। जिले के सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस्टोफर पॉल, जो विगत 8 वर्षों से राजगामी संपदा न्यास के नियम-विपरीत गतिविधियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराते आ रहे हैं, उन्होंने इस बार शासन स्तर पर हुई एक असंवैधानिक नियुक्ति को निरस्त करने की मांग की है।
श्री पॉल ने प्रमुख सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, मंत्रालय (नवा रायपुर) को लिखित शिकायत भेजकर उनके अधीनस्थ अधिकारी (अवर सचिव) द्वारा जारी नियुक्ति आदेश को तत्काल निरस्त करने का आग्रह किया है।

बायलॉस में उपाध्यक्ष पद का कोई उल्लेख नहीं

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पंजीकृत बायलॉस में उपाध्यक्ष पद का कोई प्रावधान नहीं है और न ही बायलॉस में संशोधन कर कभी ऐसा पद सृजित किया गया है। इसके बावजूद, अवर सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) द्वारा 19 मार्च 2026 को मनोज निर्वाणी को ‘श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा समिति’ के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया। श्री पॉल ने आरोप लगाया कि एक पंजीकृत न्यास के बायलॉस को दरकिनार कर अधिकारी ने अपने पद व अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एक व्यक्ति विशेष को अनुचित लाभ पहुंचाया है, जो पूर्णतः नियम-विपरीत है।

वर्ष 2015 से नहीं हुआ ऑडिट, भारी वित्तीय अनियमितता की आशंका

श्री पॉल ने बताया कि पंजीकृत बायलॉस की कंडिका 4 के अनुसार, न्यास का वार्षिक बजट (आय-व्यय) वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने से कम से कम दो माह पूर्व शासन के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है और अनुमोदन के बाद ही व्यय किया जा सकता है। इसके विपरीत, वर्ष 2015 से लेकर मार्च 2026 तक इस न्यास का ऑडिट ही नहीं कराया गया है, जो कि एक गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि तात्कालिक मध्य प्रदेश सरकार ने 25 जनवरी 1989 को राजगामी संपदा की चल-अचल संपत्ति को संरक्षित करने एवं जन-कल्याण के उद्देश्य से इसे एक सार्वजनिक न्यास बनाने का निर्णय लिया था। इसके पश्चात 9 अप्रैल 1999 को तीन लोगों को मनोनीत सदस्य नियुक्त कर ‘श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा न्यास’ एवं उसकी समिति का गठन किया गया था।

सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस्टोफर पॉल ने शासन से मांग की है कि नियम-विरुद्ध की गई इस नियुक्ति को अविलंब निरस्त किया जाए तथा न्यास में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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