मंदिर आस्था का केंद्र है, राजनीति का अखाड़ा नहीं, मंदिर में जन्मदिन मनाना भारतीय संस्कारों और मूल्यों की स्थापना है — पवन गुप्ता
अंबागढ़ चौकी – नगर पंचायत उपाध्यक्ष पवन गुप्ता ने मंदिर परिसर में जन्मदिन मनाने को लेकर सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में चल रही खबरों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने लगाए गए आरोपों को एकपक्षीय, भ्रामक और वास्तविकता से परे बताया है। विवाद पर स्पष्टीकरण देते हुए पवन गुप्ता ने कहा. कि, इन दिनों मेरे जन्मदिन के अवसर पर मंदिर परिसर में जन्मदिन मनाने को लेकर कुछ समाचार एवं सोशल मीडिया पोस्ट प्रचारित किए जा रहे हैं। इनमें यह आरोप लगाया जा रहा है कि मैंने मंदिर परिसर में केक काटकर मंदिर के मर्यादा का उलंघन किया । मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि पूरे घटनाक्रम को जिस प्रकार प्रस्तुत किया जा रहा है, वह एकपक्षीय, भ्रामक और वास्तविकता से परे है। मैं सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाला व्यक्ति हूं। मेरे पूज्य माता-पिता से मिले संस्कारों के कारण वर्षों से मेरा यह प्रयास रहा है कि मैं अपने जन्मदिन को किसी क्लब, होटल या दिखावे की पार्टी में मनाने के बजाय किसी देवस्थान, तीर्थस्थान अथवा संतस्थान पर जाकर भगवान और अपने इष्टदेव का आशीर्वाद लेकर मनाऊं। जन्मदिन के अवसर पर दीप प्रज्वलित करना, आरती पूजन करना, भगवान को भोग अर्पित करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए उत्सव से कहीं अधिक श्रद्धा और संस्कार का विषय है। मेरे लिए जन्मदिन केवल स्वयं की खुशी का दिन नहीं, बल्कि जीवन देने वाले परमात्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
*हनुमान मंदिर में बच्चों का उत्साह बढ़ाने उनके जन्मदिन पर भी मेरे द्वारा केक कटवाना मेरी परंपरा का हिस्सा*
उपाध्यक्ष ने कहा कि अंबागढ़ चौकी हनुमान मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा होता है जिसमें बच्चे और युवा भी उत्साह से शामिल होते हैं। उन दिनों किसी बच्चे का जन्मदिन होता है, तो उसकी खुशी और मनोबल बढ़ाने के लिए शुद्ध एवं सात्विक केक स्वरूप में काटकर जन्मदिन मनाया जाता है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का दिखावा या मंदिर की मर्यादा भंग करना नहीं, बल्कि बच्चों को मंदिर, धर्म, संस्कार और अपनी संस्कृति से जोड़ना है। जब बच्चे अपने जन्मदिन के अवसर पर भगवान के सामने आते हैं, हनुमान चालीसा में शामिल हो आशीर्वाद लेते हैं और अपने साथियों के साथ प्रसाद बांटते हैं, तो उनके भीतर धार्मिक संस्कारों के साथ-साथ सकारात्मकता और उत्साह का संचार होता है। बच्चों के चेहरे पर खुशी लाना, उनका मनोबल बढ़ाना और उन्हें अपनी संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ना भी मेरी भावना है। जन्मदिन को अनुशासन, पूजा-पाठ, प्रसाद और संस्कार के साथ मनाना भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर भगवान का स्मरण किया जाता है।
*मिठाई को ‘केक’ का स्वरूप दे देने से मर्यादा का उलंघन कैसे हो गया?*
नगर उपाध्यक्ष ने कहा कि जहां तक जन्मदिन के अवसर पर काटी गई तथाकथित केक की बात है, वह कोई अनुचित खाद्य पदार्थ न तो था और न ही रहता है और न कभी रहेगा, जिसे मैं दास कभी अपने इष्टदेव की सेवा मे लगाऊं हम वर्षों से शुद्ध कलाकंद, खोआ, मक्खन, काजू कतली अथवा बादाम कतली जैसी शुद्ध मिठाइयों से केक के स्वरूप में जन्मदिन मनाते आए हैं। जब कोई शुद्ध एवं सात्विक मिठाई भगवान को श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाए, भोग लगाया जाए और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाए, तो उसे मंदिर मर्यादा भंग करने की घटना के रूप में प्रस्तुत करना कहां तक उचित है, यह समाज स्वयं विचार करे। मेरी मंशा न कभी मंदिर की मर्यादा भंग करने की रही है और न ही किसी श्रद्धालु की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने की।
*मंदिर को राजनीतिक विवाद का विषय न बनाया जाए*
यदि किसी व्यक्ति अथवा संगठन को मेरे जन्मदिन मनाने के तरीके पर कोई आपत्ति थी, तो मुझसे सीधे संवाद किया जा सकता था। लोकतांत्रिक समाज में संवाद और तथ्य के आधार पर बात रखना उचित है, लेकिन मंदिर और धार्मिक आस्था जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक विवाद का रूप देना दुर्भाग्यपूर्ण है। जहां कुछ लोग विरोधी पार्टी से मिलकर स्वार्थवश पेंडुलम की तरह पार्टी बदलने वालों के साथ विपक्षी नेताओं के इशारे पर भाजपा को बदनाम करने में लगे हुए हैं और भाजपा से जुड़े लोगों के संबंध में अनर्गल बातें बनाकर विपक्ष को सहयोग करना ही जिनका ध्येय है, ऐसे लोगों का मकसद जनता को समझना चाहिए। जो लोग शुरू से ही भाजपा को बदनाम करने के प्रयास में लगे रहे हैं, उनके द्वारा धार्मिक विषय को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। मंदिर किसी राजनीतिक दल, व्यक्ति अथवा संगठन की जागीर नहीं है। मंदिर हमारी आस्था, संस्कार, श्रद्धा और सनातन परंपरा का केंद्र है। इसलिए मेरा सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से आग्रह है कि धर्म और आस्था को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम न बनाया जाए।
*भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण से कुछ लोगों को परेशानी क्यों*
पवन गुप्ता ने कहा कि आज पूरे भारतवर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और यूपी के योगी आदित्यनाथ छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत के प्रति जिस प्रकार जागरूकता और गौरव का वातावरण निर्मित हुआ है, उसे पूरा देश देख रहा है। कुछ लोग विपक्षी पार्टियों से मिलकर भारतीय संस्कृति व मंदिर को व भाजपा को बदनाम करने तैयार रहतें हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और हमारे देवस्थानों के प्रति बढ़ता सम्मान निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। लेकिन भारतीय संस्कृति और मंदिरों को किसी न किसी बहाने विवादित अथवा बदनाम करने का प्रयास किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग हो सकती है, राजनीतिक मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। मेरा सवाल केवल इतना है कि यदि कोई व्यक्ति अपने जन्मदिन पर भगवान के चरणों में जाकर पूजा-अर्चना करता है, दीपक जलाता है, आरती करता है, भोग लगाता है और प्रसाद के रूप में शुद्ध मिठाई से जन्मदिन मनाता है, तो इसमें भारतीय संस्कृति के विरुद्ध क्या है?
*मैं अपनी परंपरा और संस्कारों के अनुसार जन्मदिन मनाता रहूंगा*
कुछ लोगों को शायद यह पसंद नहीं कि मैं अपना जन्मदिन क्लब, होटल या किसी बड़ी पार्टी में मनाने के बजाय भगवान के चरणों में जाकर मनाता हूं। लेकिन मैं अपनी आस्था, अपने माता-पिता से मिले संस्कार और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार ही अपना जन्मदिन मनाता आया हूं और आगे भी मनाता रहूंगा। मैं सभी नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं समाज के प्रबुद्धजनों से आग्रह करता हूं कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी तस्वीर, वीडियो अथवा एकपक्षीय समाचार को देखकर तुरंत निष्कर्ष पर न पहुंचें। पहले पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता जानें, फिर अपनी राय बनाएं। मेरी ओर से किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था और न कभी रहेगा।राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धर्म, मंदिर और हमारी आस्था राजनीति का हथियार नहीं बननी चाहिए।
नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने पूरे मामले पर अपने विचार स्पष्ट करते हुए कहा कि मंदिर आस्था का केंद्र है, राजनीति का अखाड़ा नहीं। सनातन संस्कृति हमारी पहचान है, हमारे संस्कार हैं और हमारी विरासत है। इसका सम्मान करना केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हम सभी का दायित्व है। मैं अपने माता-पिता से मिले संस्कारों और अपनी आस्था के अनुसार भगवान के चरणों में अपना जन्मदिन मनाता हूं और आगे भी इसी परंपरा को निभाता रहूंगा।
