नेशनल लोक अदालत में बिखरी मुस्कान : 3.07 लाख से अधिक मामलों का हुआ निपटारा, टूटे रिश्ते भी जुड़े

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राजनांदगांव। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय सहित तहसील न्यायालयों में वर्ष की तीसरी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विजय कुमार होता के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत में तीन जिलों—राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के कुल 3 लाख 7 हजार 495 लंबित व प्री-लिटिगेशन मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

मामलों के त्वरित निराकरण के लिए कुल 48 खंडपीठों का गठन किया गया था। कुल निराकृत प्रकरणों में 3,04,034 मामले प्री-लिटिगेशन चरण के तथा 3,461 मामले न्यायालयों में लंबित वाद से संबंधित रहे, जिसमें कुल 339 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की समझौता राशि तय की गई। इसमें आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, एनआई एक्ट, चेक बाउंस, बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा, बिजली-टेलीफोन बिल व राजस्व विवाद शामिल थे।

लोक अदालत की ‘सफल कहानियां’: बिखरते परिवारों को मिला नया जीवन

विवाद भूल एक हुए पति-पत्नी: कुटुंब न्यायालय में लंबित भरण-पोषण के एक मामले में सेवती बाई व उनके पति बेनलाल वर्मा के बीच लंबे समय से चल रहा मनमुटाव न्यायाधीश उत्तरा कुमार कश्यप की समझाइश से समाप्त हुआ। पति-पत्नी सारे गिले-शिकवे भूलकर फिर से साथ रहने को राजी हो गए।

दाम्पत्य जीवन में लौटी खुशहाली: एक अन्य व्यवहार वाद में बैनू कुमार देवांगन और उनकी पत्नी दिव्या के बीच जारी आपसी विवाद को समाप्त कराते हुए न्यायालय ने उन्हें पुनः एक साथ रहने के लिए सहमत कराया, जिससे उनका अवयस्क बेटा अपने माता-पिता का प्यार एक साथ पा सकेगा।

गले मिलकर दूर की पुरानी रंजिश: छुईखदान न्यायालय में चक्र साइकिल से गिरने के मामूली विवाद पर दर्ज आपराधिक मामले में न्यायाधीश श्वेता पटेल की पहल पर आरोपी मनोज साहू और प्रार्थी पक्ष ने आपसी सहमति से समझौता किया और न्यायालय कक्ष में एक-दूसरे को गले लगाकर विवाद खत्म किया।

10.60 लाख रुपये में हुआ भूमि विवाद का पटाक्षेप: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार होता की खंडपीठ में संविदा व भूमि आधिपत्य से जुड़ा एक बड़ा सिविल मामला उभयपक्षों के बीच 10 लाख 60 हजार रुपये के लेन-देन की शर्त पर राजीनामे के साथ सदा के लिए समाप्त हो गया।

प्रशासनिक व न्यायिक तंत्र की रही सक्रिय सहभागिता
लोक अदालत के सफल आयोजन में कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश, जिला न्यायालय के समस्त न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि, बीएलएनएल, नगर निगम व बैंक अधिकारी तथा पैरालीगल वालंटियर्स का विशेष योगदान रहा।

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