यूपीआई पर शुल्क जनता की जेब पर बोझ डालेगा : अब्दुल कलाम खान
राजनांदगांव। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा को लेकर कांग्रेस नेता अब्दुल कलाम खान ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक एवं ओडिशा-राजस्थान अल्पसंख्यक प्रभारी खान ने कहा कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क लगाने की किसी भी व्यवस्था का असर छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
खान ने कहा कि छोटे दुकानदार, किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी और मध्यम वर्ग के लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाय-पान से लेकर किराना, दवा और यात्रा तक के छोटे भुगतान डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी तरह का शुल्क लगाया जाता है तो छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है और उसका असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका रहेगी।
खान ने यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 24.51 अरब लेनदेन हुए। इनका कुल मूल्य करीब 29.82 लाख करोड़ रुपए रहा।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लेनदेन होने से स्पष्ट है कि यूपीआई आम लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शुल्क संबंधी किसी भी निर्णय का व्यापक असर हो सकता है।
अब्दुल कलाम खान ने कहा कि जनता पहले ही महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च का सामना कर रही है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर किसी भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
उन्होंने यूपीआई पर शुल्क लगाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से अपनी नीति स्पष्ट करने और आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखने की मांग की।
हालांकि, केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में स्पष्ट किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई लेनदेन पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे। सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी नि:शुल्क रहेंगे तथा लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
