तबादले के बाद भी राजनांदगांव में डटे मुख्य लिपिक रामसिंग पाटिल, रिलिव न होने पर उठे सवाल
राजनांदगांव। आबकारी विभाग में अधिकारियों के तबादले के बाद भी कुर्सी से मोह न छूटने का मामला सामने आया है। आबकारी विभाग में मुख्य लिपिक रामसिंग पाटिल का स्थानांतरण कार्यालय जिला आबकारी अधिकारी के पद पर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कर दिया गया है। इसके बावजूद वे आज पर्यंत राजनांदगांव कार्यालय में ही डटे हुए हैं और विभाग द्वारा उन्हें रिलिव (भारमुक्त) नहीं किया गया है। आदेश जारी होने के काफी समय बाद भी रिलिविंग न मिलने से प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
उल्लेखनीय है कि राजनांदगांव आबकारी विभाग में पदस्थापना के दौरान अधिकारी पर पूर्व में भी कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। कुछ महीनों पहले इन्हीं विवादों और आरोपों के चलते उनका स्थानांतरण दुर्ग कर दिया गया था। हालांकि, राजनैतिक रसूख और सांठगांठ के बल पर वे कुछ ही समय बाद दोबारा राजनांदगांव आबकारी विभाग में अपनी पदस्थापना कराने में सफल हो गए थे।
अब एक बार फिर बलरामपुर-रामानुजगंज स्थानांतरण का आदेश होने के बाद भी उनका रिलिव न होना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम जन और विभागीय हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर अधिकारी को भाजपा के किन बड़े राजनेताओं का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके चलते शासकीय स्थानांतरण आदेशों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विभाग की इस कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर नियमानुसार उन्हें तत्काल मूल पदस्थापना स्थल के लिए रिलिव क्यों नहीं किया जा रहा है।
